रविवार, 5 अक्टूबर 2008

घोटुल एक मन्दिर है .....

घोटुल आदिवासी समुदाय का एक ऐसा मन्दिर है, जहाँ समुदाय का व्यक्ति सामाजिक व् सांस्कृतिक शिक्षा ग्रहण करता है। घोटुल आदिवासी समाज की धरोहर है, समाज की आत्मा है। आदिवासी समाज का व्यक्ति घोटुल से ही वैचारिक व सांस्कृतिक, सामाजिक व अध्यात्मिक रीति रिवाजों को अपनाने का आशीर्वद लेता है। आदिवासी संस्कृति आज विश्व के नक्शे पर एक सबसे पुरानी संस्कृति के रूप में पहचान बना रहा है, इसके पीछे कहीं न कहीं सांस्कृतिक विकास ही रहा है, जोकि आदिवासियों ने घोटुल जैसी सामाजिक व संस्कृतिक मन्दिर से ही सीखा है